अपना जन्म नक्षत्र चुनें — शेष सभी नक्षत्रों का ताराबल (जन्म, संपत, विपत, क्षेम, प्रत्यक, साधन, नैधन, मित्र, परममित्र) चक्र और तालिका दोनों रूप में देखें। धन के लिए वास्तविक शुभ तारा "संपत" है, नौवाँ "परममित्र" नहीं।
नीचे चक्र में किसी भी नक्षत्र पर क्लिक करके भी उसे जन्म-नक्षत्र बना सकते हैं।
ध्यान दें: नवतारा-चक्र की श्रेणी केवल नक्षत्र पर आधारित है, चरण से नहीं बदलती। चरण चुनने से आपकी सटीक
राशि व नवमांश निकलती है — जो नक्षत्र मात्र से नहीं मिलती (एक नक्षत्र प्रायः दो राशियों में फैला होता है)।
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राशि (चंद्र राशि)
चयनित नक्षत्र + चरण से निकली सटीक राशि —
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नवमांश राशि
D-9 वर्ग कुंडली हेतु — विवाह व सूक्ष्म फल-विचार में प्रयुक्त —
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जन्म (तटस्थ)संपत — धन शुभविपत — अशुभक्षेम — शुभप्रत्यक — अशुभसाधन — शुभनैधन — अत्यंत अशुभमित्र — शुभपरममित्र — शुभ
धन तारा (संपत)
आर्थिक कार्यों, निवेश, व्यापार-प्रारंभ के लिए सर्वाधिक शुभ माने गए नक्षत्र —
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नैधन तारा — सर्वाधिक टालें
महत्वपूर्ण/नए कार्यों हेतु सबसे अशुभ माने गए नक्षत्र —
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पूर्ण ताराबल तालिका
चयनित जन्म नक्षत्र से गिनकर प्रत्येक नक्षत्र की तारा-श्रेणी। मोबाइल पर चक्र की जगह इसे देखना आसान है।
नक्षत्र
गणना क्रम
तारा श्रेणी
फल
दो नक्षत्रों की अनुकूलता (मैत्री ताराबल)
दो व्यक्तियों, या किसी कार्य के लिए दो नक्षत्रों के बीच का पारस्परिक ताराबल जांचें — दोनों दिशाओं से (A→B और B→A)।
व्यक्ति / नक्षत्र A
⇄
व्यक्ति / नक्षत्र B
अन्य संबंधित ज्योतिष सूत्र
नवतारा के अतिरिक्त, नक्षत्र-आधारित ये सिद्धांत भी प्रायः प्रयोग में आते हैं।
चंद्र ताराबल — दैनिक मुहूर्त में प्रयोग
नवतारा की वही 9 श्रेणियाँ जन्म नक्षत्र की बजाय उस दिन के चंद्र नक्षत्र से भी गिनी जाती हैं — इसे
चंद्र ताराबल कहते हैं। यात्रा, गृह-प्रवेश, विवाह-मुहूर्त जैसे कार्यों के लिए पंचांग में प्रतिदिन का
चंद्र नक्षत्र देखकर, जन्म नक्षत्र से उसकी तारा-श्रेणी निकाली जाती है। संपत, क्षेम, साधन, मित्र, परममित्र —
इन पाँच में कार्य करना शुभ माना गया है; जन्म, विपत, प्रत्यक व नैधन तारा में नए कार्य टाले जाते हैं।
गण्ड मूल नक्षत्र
राशियों की संधि (जोड़) पर स्थित छह नक्षत्र — अश्विनी, आश्लेषा, मघा, ज्येष्ठा, मूल, रेवती —
गण्ड मूल कहलाते हैं। इनमें जन्म होने पर परंपरागत रूप से शांति-पूजा का विधान बताया जाता है; यह नियम धन का
नहीं बल्कि जन्म-समय की ग्रह-संधि स्थिति का सूचक है। यदि आपका चयनित नक्षत्र गण्ड मूल श्रेणी में है तो नीचे
तालिका में संकेत मिलेगा।
नक्षत्र स्वामी (विंशोत्तरी दशा क्रम)
प्रत्येक नक्षत्र का एक ग्रह-स्वामी होता है, जिसी क्रम पर विंशोत्तरी महादशा आधारित है। धन-योग या धन-हानि का
समय प्रायः दशा-अंतरदशा स्वामी की स्थिति से देखा जाता है, न कि अकेले तारा-चक्र से।
नक्षत्र
स्वामी ग्रह
धन-विचार के वास्तविक शास्त्रीय आधार
शास्त्रों में धन सामान्यतः इनसे देखा जाता है:
द्वितीय भाव — संचित धन व कुल-संपत्ति
एकादश भाव — आय व लाभ
पंचम व नवम भाव — पूर्व-पुण्य व भाग्य-जनित धन
धनेश व लाभेश की स्थिति — इन भावों के स्वामी ग्रह कहाँ बैठे हैं
धनयोग व दशा-अंतरदशा — विशेष योगों का सक्रिय समय
संपत तारा (नवतारा चक्र) — मुहूर्त-स्तर पर सहायक, पर मूल कुंडली-विश्लेषण का विकल्प नहीं
"नवम नक्षत्र धन देता है" — यह किसी प्रमुख ग्रंथ (बृहत्पाराशर होरा शास्त्र, फलदीपिका, जातक पारिजात, मुहूर्त
चिंतामणि) में सर्वमान्य सूत्र के रूप में नहीं मिलता; यह नवतारा की गलत व्याख्या से उत्पन्न भ्रम प्रतीत होता है।